बिना बताये , पूछे मुझसे , कहाँ चले जाते हो बाबा
कितना डर जाती हूँ तुमको समझ
नहीं आता बाबा
वह जो काला कुत्ता बाहर बैठा रहता है
अक्सर दौड़ाकर लोगों को काटा करता है
परसों उसने मम्मा को भी खूब छकाया था
मैंने ही तब शोर मचा कर उसे भगाया था
सोचो वो जब तुम्हें काटने को दौड़ायेगा
दौड़ नहीं पाते हो तुमको कौन बचायेगा .
बिना बताये -----
कितना डर ------
दादी कहती है जामुन पर कागा रहता है
शाम ढले वह भी लोगों को काटा करता है
मेरे हाथों से भी रोटी छीन ले गया था
म्याऊं उस पर झपटी पर वह दूर उड़ गया था
सिर के ऊपर उड़कर जब वह तुम्हें सताएगा
भाग नहीं पाते हो तुम को कौन बचायेगा .
बिना बताये ------
कितना डर--------
बिना बताये पूछे मुझसे कहीं नहीं जाना बाबा
हाँ मैं कह देती हूँ झूठी कसम नहीं खाना बाबा.
तुम्हें कहीं भी चलना हो तोमैं भी साथ चलूंगी
शाशा, डोरेमान,टार्ज़न सब को संग रखुंगी
समझेंगे सब अपनी भी पूरी तय्यारी है
बाबा बोले “बेटू तुझ पर सब बलिहारी है
बिना बताये पूछे तुझसे कहीं नहीं जाऊँगा
खाता हूँ मैं कसम कभी भी कसम नहीं खाऊंगा.”
-----मनोज कुमार ----२८.९.२०१४