Monday, 29 September 2014

बिना बताये पूछे मुझसे कहाँ चले जाते हो --

बिना बताये , पूछे मुझसे , कहाँ चले जाते हो बाबा
 कितना डर जाती हूँ तुमको समझ नहीं आता बाबा
वह जो काला कुत्ता बाहर बैठा रहता है
अक्सर दौड़ाकर लोगों को काटा करता है
परसों उसने मम्मा को भी खूब छकाया था
मैंने ही तब शोर मचा कर उसे भगाया था
सोचो वो जब तुम्हें काटने को दौड़ायेगा
दौड़ नहीं पाते हो तुमको कौन बचायेगा .
बिना बताये -----
कितना डर ------
दादी कहती है जामुन पर कागा रहता है
शाम ढले वह भी लोगों को काटा करता है
मेरे हाथों से भी रोटी छीन ले गया था 
म्याऊं  उस पर झपटी पर वह दूर उड़ गया था
सिर के ऊपर उड़कर जब वह तुम्हें सताएगा
भाग नहीं पाते हो तुम को कौन बचायेगा .
बिना बताये ------
कितना डर--------
बिना बताये पूछे मुझसे कहीं नहीं जाना बाबा
हाँ मैं कह देती हूँ झूठी कसम नहीं खाना बाबा.
तुम्हें कहीं भी चलना हो तोमैं भी साथ चलूंगी 
शाशा, डोरेमान,टार्ज़न सब को संग रखुंगी 
समझेंगे सब अपनी भी पूरी तय्यारी है
बाबा बोले “बेटू तुझ पर सब बलिहारी है
बिना बताये पूछे तुझसे कहीं नहीं जाऊँगा
खाता हूँ मैं कसम कभी भी कसम नहीं खाऊंगा.” 

-----मनोज कुमार ----२८.९.२०१४ 



बाबा मुझको पंख लगा दो

बाबा मुझको पंख लगा दो .

सुबह सवेरे चिड़िया रानी
लेने आती दाना-पानी
फुदक-फुदक कर खूब नहाती
मेरा डाला दाना खाती
फूलों से सब रस पी जाती
जब मैं कहती मुझे ले चलो
अपने साथ, फुर्र उड़ जाती
ऊँची डाली बैठ चिढ़ाती
पूंछ हिलाती ,पंख नचाती
मुझको साथ नहीं ले जाती

बाबा मैं कागज लायी हूँ
कैंची और गोंद लायी हूँ
सुंदर-सुंदर पंख बना दो
अच्छे से उनको चिपका दो
मेरी पीठ पाँव हाथों पर
उन्हें बांधकर टेप लगा दो
हरियल से ऊपर उड़ जाऊं
इधर उधर उड़ उसे चिढ़ाऊं
पत्तों में छुपकर मैं बैठूं
वो आये तो उसे डराऊं .

बाबा तुम मुझ पर हंसते हो
मेरा कहा नहीं करते हो
चूं-चूं से मिल मुझे सताते
हो उसके संगी बन जाते
बाबा मैं अपने पंखों से
बहुत दूर तक उड़ जाऊँगी
क्या कर लोगे बोलो जब मैं
पास तुम्हारे नहीं आउंगी .
-----मनोज कुमार --------

२५.९.२०१४ 

सबसे बड़ा कौन है घर में

सबसे बड़ा कौन है घर में
बोलो बाबा , बोलो दादी
गिली गिलहरी जब है आती
किसके हाथों खाना  खाती
किसके पीछे दौड़ लगाती
किसके आगे है मंडराती
बोलो बाबा , बोलो दादी
किसे पूछकर नन्ही चिड़िया
अपनी बगिया में आती है
किससे मिलने आती बुलबुल
खिड़की पर गाया करती है
किसे बुलाने खातिर कोयल
कुहू- कुहू की  टेर लगाती  
बोलो  बाबा , बोलो दादी
सातों बहनें सुबह-सबेरे
कूद लगातीं किसके फेरे
कांव-कांव कर कागा-राजा
बैठा छत पर किसको टेरे
चूं-चूं-चूं करती गौरैय्या
अपना दुखड़ा किसे सुनाती
बोलो बाबा , बोलो दादी
बोलो किसे सुनाने खातिर
माँ - पापा हैं लोरी गाते 
बोलो किसे मनाने खातिर
चाचा हैं घोड़ा बन जाते
मौसी, बुआ,मामियां,चाची
बोलो किसको हैं दुलरातीं .
सबसे बड़ा कौन है घर में
बोलो बाबा , बोलो दादी .
--------------मनोज कुमार (४.८.२०१४) 





मेरे गले लिपटकर मेरी नन्ही परी बोली

मेरे गले लिपट कर मेरी
नन्ही परी अश्लेषा बोली
“बाबा तुम कितने भोले हो”
तुम को  ये भी नहीं पता है  
चंदा क्यों घटता-बढ़ता है?
खेल रहा वह तारों के संग
आँख- मिचौली ,
परदे के पीछे छुपकर
देखा करता है
कौन कहाँ है ?
बाबा तुम्हें पता है सूरज
रोज शाम को 
आखिर कहाँ चला जाता है?
उसकी माँ उसको ले जाकर
दूध पिलाकर उसे सुलाती
घर की सब बत्तियाँ बुझाती
इसीलिए हर शाम अँधेरा
हो जाता है.
बाबा तुम कितने भोले हो
जाने क्या करते रहते हो
तुमको ये भी नहीं पता है
मुझको तो ये सारी  बातें
मेरी मम्मा बतलाती है
तुम भी मम्मा संग रहो
तो सारी बातें
तुम्हें तुम्हारी मम्मा
अपने आप बताती .
बाबा तुम्हें पता है
बादल क्यों उड़ जाते
ये मेरी मौसी ‘बनफुल्ली’
बाहर पंखा बड़ा लगाकर
उन्हें भगाती
कहती है मुझसे
कपड़े कैसे सूखेंगे ?
मेरी नन्ही परी अश्लेषा
मेरे गले लिपटकर बोली
“बाबा तुम बिल्कुल भोले हो”.


मनोज कुमार ----२१.०८.२०१४ (लखनऊ )