Saturday, 17 May 2014

पिया खोलो किवाड़
पिया खोलो किवाड़
कोयल की गूंजीं पुकारें.
बगिया में मरमर
दुनिया में जगहर
उतरीं किरण की कतारें.     
 पिया खोलो ........
कलियों में गुनगुन
गलियों में रुनझुन
अम्बर से गाती बहारें .
पिया खोलो.....
पतझर को भूली
हर डाली फूली
बीती को हम भी बिसारें.
पिया खोलो.....
गूंगी हैं घड़ियाँ
गीतों की कड़ियाँ
वीणा को हम झंकारें .
पिया खोलो.....
माना  कि दुःख है
विधना विमुख है
आओ उसे ललकारें .
पिया खोलो ......

---बच्चन---

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