Monday, 29 September 2014

बाबा मुझको पंख लगा दो

बाबा मुझको पंख लगा दो .

सुबह सवेरे चिड़िया रानी
लेने आती दाना-पानी
फुदक-फुदक कर खूब नहाती
मेरा डाला दाना खाती
फूलों से सब रस पी जाती
जब मैं कहती मुझे ले चलो
अपने साथ, फुर्र उड़ जाती
ऊँची डाली बैठ चिढ़ाती
पूंछ हिलाती ,पंख नचाती
मुझको साथ नहीं ले जाती

बाबा मैं कागज लायी हूँ
कैंची और गोंद लायी हूँ
सुंदर-सुंदर पंख बना दो
अच्छे से उनको चिपका दो
मेरी पीठ पाँव हाथों पर
उन्हें बांधकर टेप लगा दो
हरियल से ऊपर उड़ जाऊं
इधर उधर उड़ उसे चिढ़ाऊं
पत्तों में छुपकर मैं बैठूं
वो आये तो उसे डराऊं .

बाबा तुम मुझ पर हंसते हो
मेरा कहा नहीं करते हो
चूं-चूं से मिल मुझे सताते
हो उसके संगी बन जाते
बाबा मैं अपने पंखों से
बहुत दूर तक उड़ जाऊँगी
क्या कर लोगे बोलो जब मैं
पास तुम्हारे नहीं आउंगी .
-----मनोज कुमार --------

२५.९.२०१४ 

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