jindagi ka geet
जिन्दगी का गीत
|अथ |
अथ
कि मेरे गीतों में...
चुलबुले
से सपने हैं
ख्वाब
जो कि अपने हैं
सोंधी
–सोंधी माटी है
ऊंची-नीची
घाटी है
ढोर
हैं ,गवाले हैं
अधगिरे
शिवाले हैं
रेत
है ,पटेरे हैं
दूध
से सवेरे हैं
काला
भूत जंगल है
कल्पना
का दंगल है
सहमी-सहमी
बातें हैं
दुबकी-दुबकी
रातें हैं
धामिनों
की पूँछें हैं
नागिनों
के बदले हैं
शेर
हैं , बघेरे हैं
सारा
गांव घेरे हैं
हाँ
कि मेरे गीतों में...
अब
भी कौड़ा जलता है
सुबह
खरहा चलता है
वो
बड़ी चिरैय्या है
तुनमुनी
गौरेया है
प्यारा-प्यारा
कलुवा है
भोली-भाली
गैय्या है
महका-महका
महुआ है
टेढ़ा-मेढ़ा
सखुआ है
आम
भी है , आंधी भी
रेत
चांदी –चांदी भी
हाँ
, कि मेरे गीतों में
झम्म
–झम्म बरसातें
सीपियों
की सौगातें
राह-राह
चहला है
कजरियों
का मेला है
पत्तियों
की थिरकन है
रोम
– रोम सिहरन है
नन्हे
–नन्हे बंधे हैं
नाले
कितने गंदे हैं
रूप
– रूप दोपहरी
गीत
–गीत संझा है
हाँ
,कि मेरे गीतों में...,
दोस्ती
की बातें हैं
दुश्मनी
की खुश्बू है
हाँ
कि मेरे गीतों में
एक
दुबली औरत है
हड्डियों
का ढाँचा है
हसरतों
का खांचा है
आँखें
खोई – खोई हैं
चेहरा
दिपदिपाता है
जैसे
कोई जंगल में
इक
दिया जलाता है
तीरगी
के सहरा में
रोशनी
का दरया है
सूखी
बाँझ धरती को
झूम
– झूम बरखा है
फूंकती
है चूल्हे को
खुद
धुँआ –धुँआ सी है
मैली
–कुचली साड़ी में
स्वर्ग
की दुआ सी है
जिसकी
मीठी बातों में
ज्ञान
का समंदर है
जिसकी
तीखी झिड़की में
ओज
की लहर सी है
जो
कि कर्मयोगी है
साक्षात्
गीता है
या
कि सीता , दुर्गा है
स्वयं
अन्नपूर्णा है
हाँ
कि मेरे गीतों में....
अधबुने
से सपने हैं
ख्वाब
जो कि अपने हैं
खून
है , पसीना है
गर्व
का नगीना है
रश्क
है , मोहब्बत है
थोड़ी
– थोड़ी नफ़रत है
बाजुओं
की ताकत है
और
दिल की हिम्मत है
उड़ती
– उड़ती सुबहें हैं
तिरती
– तिरती शामें हैं
खेत
भी किताबें हैं
जादुई
सराबें हैं
सीढ़ियों
की छाओं में
रौशनी
का दरया है
चंपा
फूली – फूली है
बेला
महका – महका है
हाँ
कि मेरे गीतों में ...
एक
टिन का टप्पर है
सारे
जग से ऊपर है
लौकूराम कोई है
हाय
क्या रसोई है
जर्द
– बर्द कुर्ते हैं
बैगनों
के भुरते हैं
बैट
भी है बल्ला भी
और
खूब हल्ला भी
जागने
की बातें हैं
नींद
–नींद साधें हैं |
हाँ
कि मेरे गीतों में ..
निगह
– निगह आहू है
किरन
– किरन जादू है
सिरफिरी
उड़ानें हैं
उड़ने
के बहाने हैं
हौसले
की परवाज़ी
बेहिसाब
लफ्फाजी
कतरा
–कतरा चंदा है
गेसुओं
का फंदा है
चाँद
रोज हँसता है
ओस
रोज रोती है
रात
रोज जगती है
सुबह
रोज सोती है
आँख
का जुनूं भी है
बेखुदी
की बातें हैं
मौत
की गिरह से हम
जिंदगी
चुराते हैं
बात
– बात सपना है
शब्द
– शब्द नगमा है
वे
गली – मोहल्ले हैं
जिनमें
गीत गाये हैं
देखकर
जिन्हें अक्सर
बाद
में लजाये हैं
हाँ
कि मेरे गीतों में ..
अधखिली
मोहब्बत है
पहली
– पहली रफ्कत है
कल्पना
की खुश्बू है
जिंदगी
की रंगत है
मोतियों
की बातें हैं
क्या
हसीन रातें हैं
सोच
– सोच सहमी है
सहम
– सहम सोई है
मेरी
बेकरारी की
पूरी
किस्सागोई है |............
(meri ek lambi kavita ka ek hissa )

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