Friday, 25 May 2012


अभी  निबाह छलावों से कर  रहा हूँ  मैं

किरण से प्यार है सूरज से डर रहा हूँ मैं

मुझे न देख मेरे हौसले को कह  शाबाश

नहीं हैं पाँव तो घुटनों  पे चल रहा हूँ मैं

हर इक फ़रेब पे जी भर के मुस्कुराता हूँ

गो सोचता हूँ कि आदत बदल रहा हूँ मैं
----------मनोज कुमार---

0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home